मंगलवार, 6 मई 2014

अस्थमा दिवस विशेषः मुश्किल बढ़ा रहे डॉगी के बाल, परफ्यूम की महक

सांस उखड़ने का दौरा पड़ जाता है। जरा सा मौसम बदलता सांस फूलने लगती है। सांस रूठ जाने का एहसास होता है। कोई खास चीज खाने पीने पर सांस जैसे जवाब देती हुई महसूस होती है। दम घुटने लगता है। डॉक्टर इसे दमा के लक्षण बताते हैं। इन लक्षणों को प्रकट होने देने से रोका जा सकता है। ऐसा तभी मुमकिन है जब हमारी सांसों में सेहत घुली होगी। 

दमा के दम के साथ जाने की बात भी सालों से सुनी जा रही है। आज की तारीख में चिकित्सा विज्ञान की तरक्की ने इसे झूठा साबित कर दिया है। दमा का बेहतर इलाज संभव हो गया है तो इससे बचाव को लेकर भी लोगों को जागरूक किए जाने पर जोर दिया जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा योग गुरु के रूप में नियुक्त आयुर्वेद के सीनियर फिजीशियन डॉ.एसपी गुप्ता कहते हैं, दमा ऐसी बीमारी है जिसमें श्वास नलियां सिकुड़ जाती हैं जिसकी वजह से मरीज को सांस अंदर लेने और बाहर छोड़ने में दिक्कत होती है। सांस की इस तकलीफ की वजह तमाम तरह की एलर्जी बनती है। किसी भी प्रकार की एलर्जी अपना असर नहीं दिखा सके इसके लिए शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता, जीवनशक्ति मजबूत होना जरूरी है। प्राणायाम हमारी जीवनशक्ति बढ़ाने के साथ ही सांसों की नलियों का आयाम बढ़ाता है। सीनियर फिजीशियन डॉ.राकेश कुमार के मुताबिक दमा का कारण चाहे कोई भी एलर्जी हो, लेकिन इसका कारगर इलाज उपलब्ध हो गया है। इनहेलर तकनीक से साइड इफेक्ट का खतरा लगातार कम होता जा रहा है। इनहेलर के इस्तेमाल से फेफड़ों की ताकत बढ़ती है। इनहेलर को पहले लोग आखिरी दवा मानते थे, लेकिन अब इसे पहली और सबसे कारगर दवा के रूप में स्वीकार किया जाने लगा है। यह दवा सीधे फेफड़ों में जाती है शरीर के बाकी हिस्सों पर इसका असर नहीं पड़ता। अस्थमा रोग विशेषज्ञ डॉ.अजीम इकबाल के मुताबिक इनहेलर दमा रोगियों के लिए वरदान बन रहा है। इसकी वजह से मरीजों में दमा के दौरे पड़ने की प्रवृत्ति कम हुई है। लोगों में इनहेलर का इस्तेमाल बढ़ने लगा है। इसकी वजह से दवा खाने की जरूरत कम हो रही है। ज्यादा गंभीर स्थिति में खाने की दवा असर करना बंद कर देती है। तब इनहेलर का ही सहारा लेना पड़ता है। 

बदला हुआ लाइफ स्टाइल दमा को दावत दे रहा है। वो चाहे डॉगी पालने का शौक हो या फिर एक से बढ़कर सुगंधित परफ्यूम के इस्तेमाल का। डॉ.अजीम इकबाल के मुताबिक जिन लोगों को धूल से एलर्जी के चलते दमा होता है उनके लिए पालतू जानवरों जैसे कुत्ते के बाल भी परेशानी का कारण बनते हैं। परफ्यूम, रूम स्प्रे, कॉइल का धुआं, कोई भी क्रीम, लोशन आदि के इस्तेमाल से भी एलर्जी हो सकती है। दमा के मर्ज की कोई उम्र नहीं है, लेकिन पंद्रह से पैंतीस साल के युवाओं में इसकी प्रवृत्ति ज्यादा देखने को मिल रही है। इसकी वजह उन्हें धूल का एक्सपोजर ज्यादा होना हो सकती है।

दमा के जो मरीज अपने इलाज पर ज्यादा पैसा खर्च करने की स्थिति में नहीं हैं वह होम्योपैथी का सहारा ले सकते हैं। जिला होम्योपैथी चिकित्साधिकारी डॉ.बीपी सिंह के मुताबिक होम्योपैथी में दमा का कारगर इलाज हो सकता है। होम्योपैथी में हर मरीज को अलग अलग दवा देने की जरूरत महसूस की जाती है। क्योंकि, सभी के लक्षण एक जैसे नहीं होते। इस चिकित्सा पद्धति से इलाज करते समय मरीज की मानसिक स्थिति भी ध्यान में रखी जाती है। पचास साल से कम उम्र के मरीजों का होम्योपैथी में पूरी तरह से इलाज हो जाता है। इलाज के दौरान और सामान्य स्थिति में भी दमा के मरीजों को ठंडी और खट्टी चीजें खाने से बचना चाहिए। कोल्ड ड्रिंक, आइसक्रीम आदि का सेवन बिल्कुल नहीं करें तो अच्छा है। आयुर्वेद फिजीशियन डॉ.एसपी गुप्ता के मुताबिक, दमा के मरीजों को चावल, उड़द, दही से परहेज करना चाहिए(हिंदुस्तान संवाददाता,मुरादाबाद,6.5.14)। 

दमा के संबंध में इस ब्लॉग पर पूर्व में प्रकाशित कुछ उपयोगी आलेखों का लिंक है- 

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मंगलवार, 31 दिसंबर 2013

बीएचयू की अल्ज़ाइमर, पार्किंसन और बुढ़ापा नियंत्रक दवाओं को मान्यता मिली

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) को अल्ज़ाइमर की दवा बनाने का अमरीकी पेटेंट हासिल हुआ है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के आयुर्वेद विभाग को यह अमरीकी पेटेंट हासिल हुआ है।

अल्ज़ाइमर्स बुढ़ापे में होने वाली बीमारी है। इसमें यादाश्त चली जाती है। उम्र बढ़ने के साथ ही इसका दुष्प्रभाव भी बढ़ता जाता है। 

आयुर्वेद विभाग के प्रमुख डॉ गोविंद प्रसाद द्विवेदी ने कहा कि भारत में परंपरागत रूप से औषधीय गुणों वाले पौधौं से दवा बनाने का काम किया जाता रहा है। इन्हीं परंपरागत औषधियों को आधार बनाकर विभाग ने ब्राह्मी कल्प, वराही कल्प और अम्ल वेतक नाम से अल्ज़ाइमर, पार्किंसन और बुढ़ापे को कम करने वाली दवाएं विकसित की गई हैं। डॉ गोविंद के अनुसार इन तीनों दवाओं का अमरीका, जापान और ऑस्ट्रेलिया की स्टैंडर्ड लैबोरेट्री में परीक्षण कर इन्हें प्रमाणित किया गया है। ब्राम्ही कल्प, वराही कल्प और अम्ल वेतक आयुर्वेदिक दवाओं का अमरीका की फ़ेडरल ड्रग एजेंसी (एफ़डीए) द्वारा मान्य प्रयोगशाला में परीक्षण भी किया गया। 

डॉ गोविंद ने बताया कि इन दवाओं के चिकित्सकीय परीक्षण के लिए चार संस्थानों को अधिकृत किया गया है। ये हैं काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), एसआरएम यूनिवर्सिटी, आदेश यूनिवर्सिटी- भटिंडा और जिनोम फ़ाउंडेशन- हैदराबाद। इन चार संस्थानों ने चेन्नई के अरविंद रेमेडीज़ लिमिटेड के साथ इन तीनों दवाओं की ग्लोबल मार्केटिंग के लिए समझौता किया है। अरविंद रेमेडीज़ लिमिटेड अमरीका की फ़ेडरल ड्रग एजेंसी से अनुमति, प्रमाणन और प्रायोजन के साथ सभी ख़र्च वहन करने के लिए सहमत हो गई है। अरविंद रेमेडीज़ लिमिटेड बीएचयू और अन्य सहयोगी संगठनों में दवा के निर्माण के लिए धन उपलब्ध करवाएगी।

डॉ गोविंद कहते हैं कि ये दवाएं अल्ज़ाइमर, पार्किंसन और बुढ़ापे के असर को कम करने के अलावा अवसाद, अनिद्रा और स्मरण शक्ति के कमज़ोर होने पर प्रयोग में लाई जा सकती है। वो दावा करते हैं कि इन दवाओं के प्रयोग का शरीर पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा। डॉ गोविंद कहते हैं कि इन दवाओं के बाज़ार में आ जाने से इन बीमारियों के मरीज़ों और उनके परिजनों को काफ़ी राहत मिलेगी(मनीष कुमार मिश्रा,बीबीसी हिंदी,29 दिसम्बर,2013) 

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सोमवार, 23 सितंबर 2013

.....ताकि त्वचा रहे खिली-खिली

त्वचा की एलर्जी कई तरह से आपको परेशान कर सकती है। लाल रंग के चकत्ते, रैशेज, काले धब्बे, फुंसियां और दाग, ये सब एलर्जी का ही रूप हैं। अगर सही समय पर एलर्जी पर ध्यान न दिया जाए तो यह विकराल रूप धारण कर लेती है और आपके लिए मुसीबत का सबब बन सकती है। जानिए,एलर्जी के कारण और इससे बचने के उपायः 

स्किन एलर्जी होने के कई कारण हो सकते हैं। सही खानपान न होने से लेकर प्रदूषण और जीवन-शैली तक आपको एलर्जिक बना सकती है। एलर्जी को पहचानने का सबसे आसान तरीका यह है कि अगर आपकी त्वचा का रंग लाल हो रहा है या फिर उसमें खुजली या रैशेज हो रहे हैं तो समझ लीजिए कि आप एलर्जी के शिकार होने की कगार पर पहुंच गए हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि शुरुआत में तो एलर्जी कभी-कभी परेशान करती है, लेकिन अगर इस पर ध्यान न दिया जाए तो यह सप्ताह में दो-तीन बार और फिर रोज ही होने लगती है। 

कैसी-कैसी एलर्जी 
कई लोगों को गाय के दूध, मछली या फिर अंडे से एलर्जी हो सकती है। कई बार ऐसा भी होता है कि जिस खाद्य पदार्थ से आपको एलर्जी हो, उससे जुड़े खाद्य पदार्थ समूह से एलर्जी हो गई हो। ऐसे में उनका सेवन करते ही परेशानी शुरू हो जाती है। पानी में मिले कैमिकल्स आपके चेहरे की झुर्रियों का कारण बन सकते हैं। चूंकि ये शरीर द्वारा सीधे सोख लिए जाते हैं, इसलिए इनसे एलर्जी होने का खतरा भी अधिक होता है। पानी में जब क्लोरीन मिला होता है, तब वह अधिक नुकसानदेह हो जाता है। इसलिए कहा जाता है कि जब भी आप स्विमिंग करें तो उसके बाद साफ पानी से जरूर नहा लें। 

प्रदूषण से बचें 
हवा से भी एलर्जी हो सकती है। पानी के साथ ही प्रदूषण युक्त हवा भी त्वचा को बैक्टीरिया के संपर्क में ले आती है, जिससे एलर्जी होने का खतरा रहता है। टैटू का त्वचा पर बुरा प्रभाव देखा गया है। इस तरह की शिकायतें आजकल आम हैं। युवाओं द्वारा बनवाए जाने वाले अस्थायी टैटू में इस्तेमाल होने वाली खराब स्याही से त्वचा में जलन हो जाती है। 

कपड़ों से भी हो सकती है एलर्जी 
डर्मेटोलॉजिस्ट डॉं. शेहला अग्रवाल के अनुसार, ‘कपड़ों से भी एलर्जी हो सकती है। कभी-कभी कपड़ों पर इस्तेमाल होने वाला रंग यानी डाई त्वचा में एलर्जी पैदा कर देती है। वाशिंग मशीन में धुले कपड़ों से अगर साबुन ठीक से न निकला हो तो भी इससे त्वचा में खिंचाव आदि की समस्याएं होती हैं। मौसम में बदलाव भी स्किन एलर्जी का कारण हो सकता है। मौसम बदलने से हवा में पोलिन्स की संख्या बढ़ जाती है, जो त्वचा में एलर्जी का मुख्य कारण होती है।’ 

एलर्जी का असर 
एलर्जी से आपको दर्द, खुजली, घाव हो जाना आदि समस्याएं हो सकती हैं। अगर सही समय पर इस पर ध्यान न दिया जाए तो आप त्वचा रोग के भी शिकार बन सकते हैं। इसके अलावा कई बार प्लास्टिक की चीजों जैसे नकली आभूषण, बिंदी, परफ्यूम, चश्मे के फ्रेम, साबुन आदि से भी एलर्जी हो जाती है। इस तरह की एलर्जी को कॉन्टेक्ट डर्मेटाइटिस कहा जाता है। 

ऐसे दूर करें असर 

-फिटकरी के पानी से प्रभावित स्थान को धोकर साफ करें। जिस स्थान पर एलर्जी हो, वहां कपूर और सरसों का तेल लगाएं। आंवले की गुठली जला कर राख कर लें। उसमें एक चुटकी फिटकरी और नारियल का तेल मिला कर पेस्ट बना लें। इसे लगाते रहें। 

-खट्टी चीजों, मिर्च-मसालों से परहेज रखें। रोज सुबह नींबू का पानी पिएं। 

-चंदन, नींबू का रस बराबर मात्रा में मिला कर पेस्ट बना कर लगाएं।

डॉक्टर कहते हैं 

-ताजे फल, सब्जियों का अधिक सेवन करें। 

-एलर्जी होने पर त्वचा को केवल पानी से धोएं। साबुन या फेसवॉश का प्रयोग न करें। 

-कैलेमाइन लोशन अच्छा है। 

-डॉक्टर की सलाह से एंटी-एलर्जिक दवाएं लें। 

-विटामिन बी, सी से युक्त भोजन लें। 

घरेलू उपाय 

-दही में चुटकीभर हल्दी मिला कर लगाएं। सूखने पर धो दें। 

-चंदन पाउडर में नींबू का रस मिलाएं। इसे एलर्जिक त्वचा पर लगाएं। एलर्जिक एरिया को लगातार ठंडे पानी से धोते रहें। 

-जहां एलर्जी हो गई हो वहां पर ऑलिव ऑयल से मसाज करें। इनसे भी होती है एलर्जी परफ्यूम या खुशबू वाले अन्य उत्पाद लगाने से एलर्जी हो सकती है। इसमें आप रूम स्प्रे, क्लीनर्स, डिटर्जेट को भी शामिल कर सकते हैं। 

-हेयर डाई से भी एलर्जी होने का खतरा रहता है। इसमें पीपीडी होता है, जो एलर्जी कर सकता है। 

-कई बार कपड़ों को रिंकल और सिकुड़न से बचाने के लिए उन पर जो कैमिकल लगाया जाता है, वह भी स्किन एलर्जी कर सकता है। इस तरह की एलर्जी से पीडित लोगों में से अधिकतर फॉर्मलडिहाइड के प्रयोग के कारण एलर्जिक हो जाते हैं। इसका प्रयोग अंडरगार्मेट्स के इलास्टिक में भी होता है, इसीलिए लोगों को रैशेज आदि की समस्याएं हो जाती हैं। ऐसी एलर्जी के प्रारंभिक लक्षणों में आंखों में जलन, रैशेज आदि प्रमुख हैं।

-कॉस्मेटिक भी एलर्जी का कारण हो सकते हैं। आंखों में लालपन से लेकर लाल चकत्ते और दाने तक इनके प्रयोग की वजह से संभव हैं।

नवजातों को भी होती है स्किन एलर्जी 
ऐसा नहीं है कि स्किन एलर्जी से केवल वयस्क या बुजुर्ग ही पीडित होते हों। अक्सर देखा जाता है कि नवजातों को भी ऐसी समस्याएं होती हैं। डाइपर्स के कारण होने वाले लाल रैशेज स्किन एलर्जी की ओर ही इशारा करते हैं। इसके अलावा जन्म के कुछ समय बाद लाल रंग के दाने उभर आना भी एलर्जी का ही रूप है, जो कुछ दिन बाद स्वयं ही ठीक हो जाते हैं(आरती मिश्रा,हिंदुस्तान,दिल्ली,20.9.2013)।

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बुधवार, 3 जुलाई 2013

पसीना बहाना भी एक हुनर है

अपने शरीर को वांछित आकार देने की ख्वाहिश में लोग तमाम जतन कर रहे हैं। जिमनेजियम का चलन भी हाल के सालों में काफी बढ़ा है। हालांकि नियमित व्यायाम के बाद भी अपेक्षित परिमाण न मिलने की शिकायत आम है। कई बार कुछ परेशानियां भी हो जाती हैं इसलिए व्यायाम करते हुए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। 

सावधानी से बहाएं पसीना 
हाल में एक युवा अभिनेता अबीर गोस्वामी, जो प्यार का दर्द एवं क्राइम पैट्रोल जैसे लोकप्रिय सीरियल्स में काम करते थे, की व्यायाम करते हुए मौत हो गई। २०१२ में किसी स्वास्थ्यगत समस्या के कारण वे सर्जरी से भी गुजरे थे। चिकित्सकीय परामर्श के बिना कठोर शारीरिक श्रम उनकी मृत्यु का कारण बना। इस तरह के कई मामले हैं, जहां व्यायाम के दौरान निर्देशों का पालन न करना भारी पड़ा है। जिम में कसरत करते हुए चुनिंदा बातों पर अमल जरूरी है, साथ ही अगर आपको कोई स्वास्थ्यगत समस्या है तो चिकित्सक का परामर्श लेने के बाद ही व्यायाम करें। हेल्थ और न्यूट्रिशन के जानकार और लेखक जेम्स ए. पीटरसन का कहना है कि लोग हेल्दी बॉडी वेट मेंटेन करने के लिए जिम जाते हैं और समझते हैं कि मशीन के सामने खड़े होते ही वे सब कुछ हासिल कर लेंगे। 

पसीना बहाने से ही वजन कम नहीं होता। पसीना बहाने का मतलब है कि आपने पानी के वजन को कम किया है, यानी कोई लिक्विड लेने के साथ ही आप उतना ही वजन दोबारा हासिल कर लेते हैं। प्रायः लोगों को, जो लोग वजन घटाना चाहते हैं, पता ही नहीं होता कि व्यायाम की सही प्रणाली क्या है या मशीन का सही इस्तेमाल कैसे हो। हरेक की जरूरत के अनुसार एक अलग एक्सरसाइज प्लान भी होता है, जिसकी जानकारी जरूरी है। 

भेंट-मुलाकात नहीं, करें व्यायाम 
कई बार लोग जिम को मिलने-जुलने का अड्डा बना लेते हैं। ऐसा भी होता है कि दो मित्र एक ही वक्त पर जिम जाते हैं और बातें करते हुए वक्त बर्बाद करते हैं जो वस्तुतः व्यायाम के लिए तय था। बातों के दौरान वे कम एक्सरसाइज कर पाते हैं। वजन को लेकर गंभीर हों तो वर्क आउट पर फोकस करना जरूरी है। 

प्रोग्राम बदलें 
जिम में लगातार एक ही तरह की एक्सरसाइज से अपेक्षित परिणाम नहीं मिल, सकते। हो सकता है कि इससे शुरूआत में वज़न कम हो लेकिन अंततः बॉडी शेप में नहीं आएगी। उदाहरण के लिए,यदि आप एरोबिक एक्सरसाइज कर रहे हैं तो यह आपके मसल मास को मेंटेन करेगी और कैलोरी जलेगी। यदिआप स्ट्रेंथ ट्रेनिंग कर रहे हैं तो यह भी आपके मसल मास को तो मेंटेन करेगी लेकिन वेट कम नहीं होगा। इसलिए,यह ज़रूरी है कि आप मिक्स एक्सरसाइज प्रोग्राम का अनुसरण करें। 

स्पॉट रिडक्शन ट्रेनिंग गलत 
विशेषज्ञ कहते हैं कि खास स्पॉट जैसे पेट या भुजाएं बनाने की ही एक्सरसाइज से ओवरऑल रिजल्ट नहीं पाए जा सकते। यह बात ध्यान रखी जानी चाहिए कि शरीर जहां से वहां से,किसी भी हिस्से से फैट प्राप्त करता है,इसलिए आप कैलोरी के बहुत ही संतुलित ट्रेनिंग प्रोग्राम से जलाए जाने पर फोकस करें।

व्यायाम का सही तरीक़ा 
जिम में व्यायाम करते हुए इस बात का ख्याल रखा जाना चाहिए कि आप किसी मशीन का कैसा इस्तेमाल कर रहे हैं या किसी एक्सरसाइज को कितने सही ढंग से कर रहे हैं। ग़लत तकनीक से एक्सरसाइज करने के कारण चोट,मोट और अन्य तक़लीफें हो सकती हैं। बेहतर होगा कि किसी प्रोफेशनल ट्रेनर के साथ व्यायाम की शुरूआत करें। किसी एक्सरसाइज प्रोग्राम का अनुसरण करने की जल्दबाज़ी न करें,अन्यथा थकान हो सकती है। 

विशेषज्ञ की राय 
जिम शुरू करने से पहले विशेषज्ञ से कंसल्ट करना जरूरी है ताकि मसल कंडीशन के अनुसार व्यायाम किया जा सके। खासकर ३५ पार कार्डियक कंडीशन की जांच जरूरी है ताकि शारीरिक मेहनत उसी के ध्यान में रखते हुए किया जा सके। व्यायाम के मकसद के अनुसार भी एक्सपर्ट तय करते हैं कि किस तरह के व्यायाम किए जाने चाहिए ताकि अधिकतम लाभ हो, जैसे वजन बढ़ाना, वजन कम करना या टोन करने के लिए। -डॉ वरुण व्यास, वरिष्ठ फिजियोथैरेपिस्ट, इंदौरसेहत में प्रकाशित समस्त आलेख उच्च शिक्षित, योग्य एवं अनुभवी चिकित्सकों द्वारा लिखे जाते हैं, परंतु पाठक इनके आधार पर स्वयं अपनी चिकित्सा प्रारंभ न करें। इस संबंध में पत्रिका स्वयं को सारे विधिक दायित्वों से मुक्त करती है(इंदौर के डॉ. वरूण व्यास का यह आलेख नई दुनिया के सेहत परिशिष्ट,जून द्वितीयांक में प्रकाशित है)।

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बुधवार, 5 जून 2013

दौड़ें,कि चलें?

व्यायाम की दुनिया में आजकल दौड़ना लोकप्रिय है। बाकी दुनिया की ही तरह भारत में भी लंबी दौड़ लगाने वालों के संगठन बन गए हैं, जो हाफ मैराथन, मैराथन, सुपर मैराथन वगैरह आयोजित करते रहते हैं। दौड़ाकों को जरूरी मशविरा और सहायता देने वाले लोग भी काफी हैं। शायद आज की आधुनिक सुविधाओं व उपकरणों से भरी दुनिया में दौड़ना आदिम खुशी का प्रतीक बन गया है। इसके बरक्स पैदल चलना या टहलना हमेशा से सबसे ज्यादा लोकप्रिय व्यायाम रहा है। कुछ लोग रोज टहलते हैं, कुछ को बीच-बीच में खयाल आता है कि वजन बढ़ रहा है, तो वे कुछ दिन टहलते हैं और फिर छोड़ देते हैं। महात्मा गांधी रोज दस मील टहलते थे। सरदार पटेल के बारे में कहा जाता है कि वह राजा-नवाबों को सुबह की सैर पर ले जाते थे और आराम के आदी राजा-नवाब सैर खत्म होने से पहले ही सरदार पटेल की शर्तो पर भारत में विलय के लिए मान जाते थे। लेकिन सवाल यह है कि सेहत के लिहाज से क्या बेहतर है, दौड़ना या चलना? अगर दौड़कर या चलकर समान कैलोरी खर्च की जाए, तो किससे ज्यादा फायदा होगा? 

पिछले दिनों इस विषय पर कुछ अध्ययन हुए हैं। इन अध्ययनों से पता चलता है कि सेहत के लिहाज से दोनों ही बेहतरीन व्यायाम हैं, लेकिन दोनों के फायदे कुछ अलग-अलग हैं। दौड़कर या चलकर लगभग समान कैलोरी खर्च करने वाले दो समूहों की तुलनात्मक जांच से यह मालूम हुआ कि वजन घटाने और कम वजन बनाए रखने के लिहाज से दौड़ना ज्यादा अच्छा व्यायाम है। दौड़ने वालों की कमर की नाप और बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) चलने वालों से कहीं बेहतर साबित हुए। बाकी कई फायदे दोनों ही समूहों के लिए एक जैसे थे, लेकिन यह पाया गया कि दिल की सेहत के लिए चलने से ज्यादा फायदा होता है। यानी अगर आपका मुख्य जोर वजन घटाने पर है, तो दौड़िए और अगर दिल का मामला है, तो तेज चलना अच्छा है। दौड़ने से वजन ज्यादा घटने की कई वजहें हैं। एक महत्वपूर्ण वजह तो यह है कि दौड़ने से मेटाबॉलिज्म ज्यादा तेज होता है, इसलिए ऊर्जा ज्यादा खर्च होती है। एक सुझाव यह भी है कि चलने या दौड़ने से पहले कुछ दूसरे व्यायाम करने, मसलन भार उठाने से वजन ज्यादा घटता है, क्योंकि इससे मेटाबॉलिज्म और भी ज्यादा तेज हो जाता है। अध्ययन में एक चीज यह सामने आई, दौड़ने से पेट में एक एंजाइम पेप्टाइड वाई वाई ज्यादा बनता है। यह एंजाइम भूख पर नियंत्रण रखता है, इसलिए दौड़ने वालों की खुराक चलने वालों से कम होती है। यह देखा गया कि नियमित चलने वालों से अनियमित दौड़ने वालों का भी वजन कम रहा।

जहां तक दिल का मामला है, इसमें दौड़ने की अपेक्षा चलना इसलिए अधिक फायदेमंद होगा, क्योंकि दौड़ना ज्यादा कठिन व श्रमसाध्य व्यायाम है। जैसा कि पेशेवर खिलाड़ियों के साथ होता है कि शरीर पर बहुत ज्यादा जोर पड़ने की वजह से उन्हें कुछ नुकसान भी उठाने पड़ते हैं। सेहत के लिहाज से फायदेमंद व्यायाम वही होता है, जो न बहुत ज्यादा हो और न बहुत कम। यह भी देखने में आया है कि जो पेशेवर लंबी दूरी के धावक होते हैं, उनके दिल पर बुरा असर पड़ता है। इसका मतलब है कि दौड़ने से जो भी फायदा होता है, उसका कुछ अंश दिल पर पड़ने वाले जोर की वजह से कम हो जाता है। इसका मतलब यह कतई नहीं कि दौड़ना सेहत के लिए बुरा है, बस उतना फायदेमंद नहीं है, जितना चलना है। सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण मुद्दा यह है कि आपको मजा किसमें आता है। जिसमें भी मजा आता हो, वही कीजिए, जरूरी यह है कि व्यायाम कीजिए, थोड़ा-बहुत नफा-नुकसान तो चलता रहता है(संपादकीय,हिंदुस्तान,दिल्ली,02 जून,2013)।

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